UP News: देशभर में टोल प्लाजा पर सॉफ्टवेयर के जरिए भारी फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने मिर्जापुर के अतरैला टोल प्लाजा पर कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने 200 से ज्यादा टोल प्लाजा पर एक खास सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करवा कर करोड़ों रुपये का गबन किया।
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
मामला तब सामने आया जब यूपी एसटीएफ ने अतरैला टोल प्लाजा पर छापा मारा। जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के कंप्यूटर सिस्टम में सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ की थी। इस फर्जीवाड़े के तहत बिना फास्टैग वाली गाड़ियों से दोगुना टोल वसूला जाता था, लेकिन इस पैसे को NHAI को भेजने की बजाय खुद के खातों में डाल दिया जाता था।
कैसे काम करता था फर्जी सॉफ्टवेयर?
फर्जीवाड़े का तरीका बेहद शातिर था। टोल प्लाजा पर बिना फास्टैग वाली गाड़ियों से दोगुना टोल लिया जाता, लेकिन NHAI के असली सिस्टम में उसे “एक्जेम्प्टेड श्रेणी” में दिखाया जाता। गाड़ी मालिक को जो रसीद दी जाती, वह हूबहू NHAI की असली रसीद जैसी होती।
इसके अलावा, औसतन 5% लेनदेन NHAI के असली सॉफ्टवेयर के जरिए किया जाता, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन बाकी 95% धनराशि फर्जी सॉफ्टवेयर के माध्यम से सीधे अपने खाते में डाल दी जाती थी।
100 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला!
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घोटाला 100 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। हालांकि, इसका सीधा असर आम जनता पर नहीं पड़ा, लेकिन यह घोटाला जनता के पैसे का गबन है, जो सड़क निर्माण और विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल होना था।
NHAI ने उठाए सख्त कदम
घोटाले के खुलासे के बाद NHAI ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब सभी क्षेत्रीय अधिकारियों और परियोजना निदेशकों को टोल प्लाजा ऑपरेटरों की सख्त निगरानी और नियमित ऑडिट करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, सभी लेनदेन का सही रिकॉर्ड रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
क्या है बिना फास्टैग वाली गाड़ियों पर दोगुना टोल का नियम?
टोल प्लाजा पर नियम है कि यदि कोई गाड़ी बिना फास्टैग के आती है, तो उससे दोगुना टोल लिया जाता है। इस दोगुने टोल का 50% हिस्सा NHAI को भेजा जाना अनिवार्य है। लेकिन, इस घोटाले में यह हिस्सा NHAI को न देकर फर्जीवाड़ा किया गया।
आगे क्या?
फिलहाल गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि देशभर में इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं। NHAI के सख्त कदमों के बाद उम्मीद है कि ऐसे घोटालों पर रोक लगाई जा सकेगी।
