दिल्ली-एनसीआर को एक नई उड़ान देने के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) का निर्माण तेजी से पूरा किया जा रहा है। पहले चरण का 80% से अधिक काम पूरा हो चुका है और यह एयरपोर्ट 17 अप्रैल 2025 से वाणिज्यिक उड़ानों के लिए तैयार हो जाएगा। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को उत्तर भारत के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है, जो इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का बेहतरीन विकल्प बनेगा।
निर्माण कार्य अंतिम चरण में
नोएडा एयरपोर्ट के पहले चरण में टर्मिनल बिल्डिंग का 80% काम पूरा हो चुका है, जबकि एयरसाइड कार्य जैसे रनवे, टैक्सीवे, एप्रन और नेविगेशन सिस्टम 88.9% तक पूरा कर लिया गया है। लैंडसाइड कार्य, जिसमें टर्मिनल, एक्सेस रोड और पार्किंग शामिल हैं, 78.7% तक पूरा हो चुका है। एटीसी टावर का निर्माण भी पूरा हो गया है।
पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता
एयरपोर्ट के पहले चरण में सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को सेवा देने की क्षमता होगी। हाल ही में एक सफल टेस्ट फ्लाइट में एयरबस A320 ने रनवे पर सफल लैंडिंग और टेकऑफ किया था। इसके बाद एयरपोर्ट कंसेशनर ने एरोड्रोम लाइसेंस के लिए आवेदन किया, जिसके मार्च 2025 तक मिलने की संभावना है।
अब तक 9024 करोड़ रुपये खर्च
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के लिए निर्धारित ₹10,056 करोड़ के बजट में से अब तक ₹9,024 करोड़ खर्च हो चुके हैं। इसमें यूपी सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के लिए ₹4,326 करोड़ और यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा परियोजना विकास के लिए ₹5,730 करोड़ का योगदान शामिल है।
बेहतर कनेक्टिविटी के लिए एक्सप्रेसवे और लिंक रोड
नोएडा एयरपोर्ट को यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 750 मीटर लंबा आठ-लेन एलिवेटेड रोड और चार क्लोवरलीफ इंटरचेंज बनाए गए हैं। इसके अलावा, 31 किलोमीटर लंबी लिंक रोड एयरपोर्ट को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी। इस सड़क का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और कुछ महीनों में पूरा हो जाएगा।
दूसरे चरण में एमआरओ हब और दूसरा रनवे
एयरपोर्ट के दूसरे चरण में MRO (Maintenance, Repair, Overhaul) हब और एक अतिरिक्त रनवे का विकास भी प्रस्तावित है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और संबंधित दस्तावेज सरकार को भेजे जा चुके हैं।
आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल उत्तर भारत का सबसे बड़ा और आधुनिक हवाई अड्डा बनेगा, बल्कि इससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। इस परियोजना से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यटन उद्योग को भी लाभ मिलेगा।
