ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण निर्माण और विध्वंस (सी एंड डी) अपशिष्ट के निस्तारण की समस्या के समाधान के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। प्राधिकरण पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत सी एंड डी अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रहा है। इस संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन 300 से 500 टन कचरा निस्तारित करने की होगी।

पुराने कचरे का भी होगा निस्तारण

इस समय शहर में एकमात्र 100 टीपीडी (टन प्रति दिन) की सी एंड डी अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधा इकोटेक-3 में स्थित है, जिसे बढ़ाकर 300 टीपीडी किया जा सकता है। इसके अलावा, शहर में 70 हजार टन से अधिक पुराने निर्माण सामग्रियों के कचरे का निस्तारण भी इसी परियोजना के तहत किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा में वर्तमान में छह अपशिष्ट संग्रहण प्वाइंट हैं, जहां से कचरे को इकट्ठा किया जाता है।

अवैध मलबा फेंकने वालों पर सख्ती, लगेगा भारी जुर्माना

सी एंड डी अपशिष्ट के अवैध निस्तारण को रोकने के लिए प्राधिकरण ने एक हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने की योजना बनाई है।

  • व्यक्तिगत स्तर पर कचरा डंप करने पर1,000 रुपये का जुर्माना
  • गैर-आवासीय एवं व्यावसायिक निर्माण स्थलों पर उल्लंघन करने पर2,000 रुपये का जुर्माना
  • बिल्डरों एवं डेवलपर्स के लिए नियमों का उल्लंघन करने पर25,000 रुपये तक का जुर्माना

प्राधिकरण और कार्यदायी संस्था दोनों ही उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। जुर्माने की 70% राशि एजेंसी के पास जाएगी और 30% ग्रेनो प्राधिकरण के खाते में जमा होगी।

पांच टन से कम कचरा उत्पादकों के लिए अलग नियम

पांच टन से कम कचरा उत्पादकों को यह विकल्प दिया जाएगा कि वे अपने वाहनों से अपशिष्ट संग्रहण बिंदुओं तक पहुंचाएं। हालांकि, उन्हें दरवाजे पर कचरा संग्रहण सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी अस्थायी दर 125 रुपये प्रति टन प्रस्तावित की गई है। वहीं, पांच टन से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले उत्पादकों को निर्धारित संग्रहण प्वाइंट पर ही कचरा डंप करना होगा।

पीपीपी मॉडल पर सात साल के लिए एजेंसी का चयन

सी एंड डी अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र अस्तौली गांव या अन्य किसी स्थान पर स्थापित किया जाएगा। इसे पीपीपी मॉडल पर सात साल के लिए संचालित किया जाएगा, जिसे दो बार चार-चार साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। इस तरह, अधिकतम 15 वर्षों तक यह परियोजना चल सकती है

चयनित एजेंसी को ग्रेटर नोएडा के सभी नए एवं पुराने सी एंड डी कचरे के संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसमें सड़कों के किनारे, जंक्शन बिंदुओं और अनधिकृत डंपिंग स्थलों पर पड़े कचरे का भी निस्तारण शामिल होगा।

18.40 करोड़ की लागत से बनेगा संयंत्र

इस परियोजना की अनुमानित लागत 18.40 करोड़ रुपये होगी। परियोजना शुरू होने के एक वर्ष के भीतर पूरे शहर के पुराने और अवैध रूप से पड़े कचरे को हटा दिया जाएगा। इस अवधि के बाद, एजेंसी बिना किसी शुल्क के कचरे को एकत्र, परिवहन और संसाधित करेगी।

सी एंड डी अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 का पालन अनिवार्य

प्रवर्तन दल इस परियोजना के तहत सी एंड डी अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के अनुपालन की निगरानी करेगा। सभी निर्माण कार्यों से निकलने वाले कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि शहर स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बना रहे।

संयंत्र बनने से क्या होंगे फायदे?

शहर में सी एंड डी कचरे की अवैध डंपिंग रुकेगी।
शहर के पुराने 70 हजार टन मलबे का निस्तारण होगा।
मलबे को रिसाइकिल कर पुनः उपयोग में लाया जाएगा।
निर्माण कार्यों से निकलने वाले कचरे के लिए व्यवस्थित समाधान मिलेगा।
शहर की सफाई व्यवस्था और पर्यावरण को लाभ मिलेगा।